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Daily Quotes by CalendarLabs
सुनो मेरे द्वारा -
श्रावण मास के अचूक टोटके
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सावन मास में सोमवार किए गए टोटके बहुत ही प्रभावशाली होते हैं क्योंकि तंत्र के देवता शिव हैं और सावन का महीना भगवान शिव को विशेष प्रिय है। रुका हुआ काम बनाने के लिए शिव मंदिर में जाकर शिवलिंग पर दूध की धार चढ़ाएं। मन ही मन ऊँ नम: शिवाय का जप करते हुए जिस कार्य के लिए आप जा रहे हैं, उसे पूर्ण करने की प्रार्थना करें। ध्यान रहे कि दूध की धार तब तक टूटनी नहीं चाहिए जब तक कि प्रार्थना पूर्ण न हो जाए। अंत में चंदन से शिवलिंग का पूजन कर सफेद रंग के प्रसाद के साथ पांच किशमिश, पांच पताशे व लौंग का जोड़ा चढ़ाएं। फिर हाथ जोड़कर घर आ जाए। आपको सफलता अवश्य मिलेगी। समान काम समान इंकम के लिए टोटका सभी की इन्कम एक जैसी नहीं होती। किसी की इन्कम अधिक होती है और किसी की कम। कई बार ऐसा भी होता है कि समान रूप से काम करने से बाद भी योग्य व्यक्ति को कम वेतन मिलता है। अगर आप चाहते हैं कि आपकी आमदनी में वृद्धि हो तो नीचे लिखे टोटकों से आपकी यह इच्छा पूरी हो सकती है। कहीं से बांस का बांदा लेकर लेकर आए। उस बांदा को घर के भीतर छत में 9 दिन तक लटकाकर दसवें दिन मिट्टी के बर्तन में बंद करके रखने से भाग्य में वृ...
सूर्यग्रहण 21 जून 2020
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आने वाली 21 जून, रविवार को सूर्य ग्रहण लग रहा है। इस खगोलीय घटना को लेकर सभी के मन में जिज्ञासा है। ज्योतिष गणना के अनुसार यह ग्रहण देश व दुनिया के लिए कई अर्थों में निर्णायक साबित हो सकता है। सूर्य ग्रहण से 16 दिन पहले चंद्र ग्रहण था और 14 दिन बाद भी चंद्र ग्रहण लगेगा। 30 दिन के अंतर में तीन ग्रहणों का संयोग बहुत प्रभावी एवं फलदायक माना जा रहा है। ज्योतिषाचार्य डॉ शोनू मेहरोत्रा के अनुसार सूर्य ग्रहण के बाद सृष्टि में राजनीतिक, सामाजिक, आर्थिक तौर पर उथल-पुथल मच सकती है लेकिन यह ग्रहण कुछ राशियों के लिए शुभ परिणाम के संकेत भी दे रहा है और कुछ राशियों के लिए अशुभ संकेत मिल रहे हैं। यह ग्रहण 12 में से 8 राशियों के लिए अशुभ रहेगा आगरा में ताबड़तोड़ फायरिंग, दहली आवास विकास कॉलोनी, राहगीर घायल आगरा में ताबड़तोड़ फायरिंग, दहली आवास विकास कॉलोनी, राहगीर घायल यह भी पढ़ें अशुभ - वृष, मिथुन, कर्क, तुला, वृश्चिक, धनु, कुंभ और मीन। सामान्य - मेष, मकर, कन्या और सिंह। ग्रह चलेंगे उल्टी चाल 21 जून को लगने वाला सूर्य ग्रहण इस बार कई ज्योतिषिय घटना लेकर आ रहा है। इस ग्रहण पर छह ग्रह वक्...
अमावस्या : व्रत और पूजन
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हिंदू धर्म में अमावस्या विशेष धार्मिक महत्व रखती है। खास कर सोमवती अमावस्या के दिन सुहागिन महिलाओं द्वारा अपने पति की दीर्घायु कामना के लिए व्रत रखने का विधान है। इस दिन मौन व्रत रहने से सहस्र गोदान का फल प्राप्त होता है, ऐसा पुराणों में वर्णित है। विशेष कर सोमवार को भगवान शिवजी का दिन माना जाता है। इसलिए सोमवती अमावस्या पर शिवजी की आराधना, पूजन-अर्चना उन्हीं को समर्पित होती है। इसीलिए सुहागिन महिलाएं पति की दीर्घायु की कामना करते हुए पीपल के वृक्ष में शिवजी का वास मानकर उसकी पूजा और परिक्रमा करती हैं। पुराणों के अनुसार अमावस्या के दिन स्नान-दान करने की परंपरा है। वैसे तो इस दिन गंगा-स्नान का विशिष्ट महत्व माना गया है, परंतु जो लोग गंगा स्नान करने नहीं जा पाते, वे किसी भी नदी या सरोवर तट आदि में स्नान कर सकते हैं तथा शिव-पार्वती और तुलसीजी का पूजन कर अमावस्या का लाभ उठा सकते हैं। मंगलवार को आनेवाली अमावस्या को भौमवती अमावस्या के नाम से जाना जाता है, इस दिन भी निम्नानुसार पूजन करना फलदायी रहता है। इस दिन मौन व्रत को धारण करने से पुण्य प्राप्ति होती है। ----------------- कैसे ...
एकादशी की आरती-
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एकादशी की आरती। इस आरती में सभी एकादशियों के नाम शामिल है। ॐ जय एकादशी, जय एकादशी, जय एकादशी माता। विष्णु पूजा व्रत को धारण कर, शक्ति मुक्ति पाता ।। ॐ।। एकादशी की आरती ॐ जय एकादशी, जय एकादशी, जय एकादशी माता । विष्णु पूजा व्रत को धारण कर, शक्ति मुक्ति पाता ।। ॐ।। तेरे नाम गिनाऊं देवी, भक्ति प्रदान करनी । गण गौरव की देनी माता, शास्त्रों में वरनी ।।ॐ।। मार्गशीर्ष के कृष्णपक्ष की उत्पन्ना, विश्वतारनी जन्मी। शुक्ल पक्ष में हुई मोक्षदा, मुक्तिदाता बन आई।। ॐ।। पौष के कृष्णपक्ष की, सफला नामक है, शुक्लपक्ष में होय पुत्रदा, आनन्द अधिक रहै ।। ॐ ।। नाम षटतिला माघ मास में, कृष्णपक्ष आवै। शुक्लपक्ष में जया, कहावै, विजय सदा पावै ।। ॐ ।। विजया फागुन कृष्णपक्ष में शुक्ला आमलकी, पापमोचनी कृष्ण पक्ष में, चैत्र महाबलि की ।। ॐ ।। चैत्र शुक्ल में नाम कामदा, धन देने वाली, नाम बरुथिनी कृष्णपक्ष में, वैसाख माह वाली ।। ॐ ।। शुक्ल पक्ष में होय मोहिनी अपरा ज्येष्ठ कृष्णपक्षी, नाम निर्जला सब सुख करनी, शुक्लपक्ष रखी।। ॐ ।। योगिनी नाम आषाढ में जानों, कृष्णपक्ष करनी। देवशयनी नाम कहायो, शुक्लपक्ष धरनी ।। ॐ ।। काम...
सोलह सोमवार व्रत-
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सोलह सोमवार व्रत : पढ़ें पौराणिक एवं प्रामाणिक कथा सोमवार की व्रत कथा :- > > एक समय श्री महादेवजी पार्वती के साथ भ्रमण करते हुए मृत्युलोक में अमरावती नगरी में आए। वहां के राजा ने शिव मंदिर बनवाया था, जो कि अत्यंत भव्य एवं रमणीक तथा मन को शांति पहुंचाने वाला था। भ्रमण करते सम शिव-पार्वती भी वहां ठहर गए। पार्वतीजी ने कहा- हे नाथ! आओ, आज इसी स्थान पर चौसर-पांसे खेलें। खेल प्रारंभ हुआ। शिवजी कहने लगे- मैं जीतूंगा। इस प्रकार उनकी आपस में वार्तालाप होने लगी। उस समय पुजारीजी पूजा करने आए। पार्वतीजी ने पूछा- पुजारीजी, बताइए जीत किसकी होगी? पुजारी बोला- इस खेल में महादेवजी के समान कोई दूसरा पारंगत नहीं हो सकता इसलिए महादेवजी ही यह बाजी जीतेंगे। परंतु हुआ उल्टा, जीत पार्वतीजी की हुई। अत: पार्वतीजी ने पुजारी को कोढ़ी होने का श्राप दे दिया कि तूने मिथ्या भाषण किया है। अब तो पुजारी कोढ़ी हो गया। शिव-पार्वतीजी दोनों वापस चले गए। कुछ समय पश्चात अप्सराएं पूजा करने आईं। अप्सराओं ने पुजारी के उसके कोढ़ी होने का कारण पूछा। पुजारी ने सब बातें बता द...
हरियाली अमावस्या-
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श्रावण अमावस्या या हरियाली अमावस्या का महत्व हिंदू पंचांग के अनुसार, श्रावण अमावस्या का त्यौहार श्रावण माह के कृष्ण पक्ष की अंतिम तिथि में मनाया जाता है। इस अमावस्या को हरियाली अमावस्या भी कहा जाता है क्योंकि इसके ठीक 3 दिन बाद हरियाली तीज आती है। इस बार यह गुरुवार, 1 अगस्त 2019 को है। धार्मिक मान्यताओं व हिन्दू पञ्चांग के अनुसार हर माह के कृष्ण पक्ष की अंतिम तिथि को अमावस्या तिथि के नाम से पुकारा जाता है। इस तिथि को एक खास तिथि के रूप में माना जाता है। अमावस्या के दिन भूत-प्रेत, पितृ, पिशाच, निशाचर जीव-जंतु और दैत्य ज्यादा सक्रिय और उन्मुक्त रहते हैं। ऐसे दिन की प्रकृति को जानकर विशेष सावधानी रखनी चाहिए। इस दिन गंगा स्नान दान पुण्य के लिये यह बहुत ही सौभाग्यशाली तिथि है। खासकर पितरों की आत्मा की शांति के लिये हवन-पूजा, श्राद्ध, तर्पण आदि करने के लिये तो अमावस्या श्रेष्ठ तिथि होती है। धर्मग्रंथों में चन्द्रमा की 16वीं कला को ‘अमा’ कहा गया है। अमावस्या के दिन चन्द्र नहीं दिखाई देता अर्थात जिसका क्षय और उदय नहीं होता है उसे अमावस्या कहा गया है, तब इसे ‘कुहू अमावस्या’ भी कहा जाता ...
श्रावण मास 10 विशेष बातें-
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क्या है श्रावण मास का महत्व : 10 बातों से जानिए क्यों करें इस मास में पूजा-अर्चना श्रावण मास का हिंदू धर्म में बड़ा महत्व है। आइए 10 विशेष बातों से जानें इस पवित्र महीने की विशेषताएं... 1. श्रावण मास में भगवान शिव की पूजा-आराधना का विशेष विधान है। हिंदू पंचांग के अनुसार यह महीना वर्ष का पांचवां माह है और अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार सावन का महीना जुलाई-अगस्त में आता है। 2. इस दौरान सावन सोमवार व्रत का सर्वाधिक महत्व बताया जाता है। दरअसल श्रावस मास भगवान भोलेनाथ को सबसे प्रिय है। इस माह में सोमवार का व्रत और सावन स्नान की परंपरा है। श्रावण मास में बेल पत्र से भगवान भोलेनाथ की पूजा करना और उन्हें जल चढ़ाना अति फलदायी माना गया है। 3. शिव पुराण के अनुसार जो कोई व्यक्ति इस माह में सोमवार का व्रत करता है भगवान शिव उसकी समस्त मनोकामनाओं को पूर्ण करते हैं। सावन के महीने में लाखों श्रद्धालु ज्योर्तिलिंग के दर्शन के लिए हरिद्वार, काशी, उज्जैन, नासिक समेत भारत के कई धार्मिक स्थलों पर जाते हैं। 4.सावन के महीने का प्रकृति से भी गहरा संबंध है क्योंकि इस माह में वर्षा ऋतु होने से संपूर्ण धरती बारिश से ...
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