कर्क संक्रांति
सूर्य के कर्क में प्रवेश करने के कारण ही इसे कर्क संक्रांति कहा जाता है। इस दिन सूर्य देव के साथ ही अन्य देवता गण भी निद्रा में चले जाते हैं। सृष्टि का भार भोलेनाथ संभालेंगे इसीलिए श्रावण मास में शिव पूजन का महत्व बढ़ जाता है।
कर्क संक्रांति से भगवान विष्णु के पूजन का खास महत्व होता है यह पूजन एकादशी तक निरंतर जारी रहता है क्योंकि इस एकादशी के दिन विष्णु देव शयन आरंभ कर देते हैं। इसीलिए इसे देवशयनी एकादशी कहते हैं। इस दिन से 4 महीनों के लिए देव शयन करने चले जाते हैं।
कर्क संक्रांति के दिन कपड़े, खाद्य सामग्री और तेल दान का बहुत महत्व होता है। इस संक्रांति को मानसून के प्रारंभ के रूप में भी जाना जाता है। कर्क संक्रांति के साथ शुरू होने वाला दक्षिणायन मकर संक्रांति पर समाप्त होता है जिसके बाद उत्तरायण प्रारंभ होता है।
दक्षिणायन के चारों महीनों में भगवान विष्णु और भगवान शिव का पूजन किया जाता है। इस बीच लोग अपने पितरों की शांति के लिए पूजन अथवा पिंडदान आदि भी करते हैं।
कर्क संक्रांति को किसी भी शुभ और महत्वपूर्ण नए कार्य के प्रारंभ के लिए शुभ नहीं माना जाता है। इस समय किए जाने वाले कार्यों में देवों का आशीर्वाद नहीं मिलता।
कर्क संक्रांति :
11 खास बातें
सूर्य जब किसी राशि का संक्रमण करते हैं तो यह संक्रांति होती है।
सूर्य प्रत्येक राशि में संक्रमण करते हैं इसलिए 12 संक्रांति होती हैं।
इनमें से मकर संक्रांति और कर्क संक्रांति का विशेष महत्व होता है।
जिस तरह से मकर संक्रांति से अग्नि तत्व बढ़ता है चारों तरफ सकारात्मक और शुभ ऊर्जा का प्रसार होने लगता है उसी तरह कर्क संक्रांति से जल तत्व की अधिकता हो जाती है। इससे वातावरण में नकारात्मकता आने लगती है।
दूसरे शब्दों में सूर्य के उत्तरायन होने से शुभता में वृद्धि होती है वहीं सूर्य के दक्षिणायन होने से नकारात्मक शक्तियां प्रभावी हो जाती है और देवताओं की शक्ति कमजोर होने लगती है।
यही वजह है कि दक्षिणायन से आरंभ कर्क संक्रांति से चातुर्मास आरंभ हो जाता है और शुभ कार्यों की मनाही हो जाती है।
लोग सूर्योदय के समय पवित्र नदियों में स्नान करते हैं और सूर्यदेव से सदा स्वस्थ रहने से कामना करते हैं।
भगवान शिव, विष्णु और सूर्यदेव के पूजन का खास महत्व होता है।
विष्णु सहस्त्रनाम का जाप किया जाता है।
दान, पूजन और पुण्य कर्म आरंभ हो जाते हैं।
4 माह किसी भी शुभ और नए कार्य का प्रारंभ नहीं करना चाहिए।
क्या सच में सोने चले जाएंगे सारे देवता
वास्तव में यह एक पारंपरिक धारणा है कि सृष्टि का कार्यभार संभालते हुए भगवान विष्णु बहुत थक जाते हैं। तब माता लक्ष्मी उनसे निवेदन करती है कि कुछ समय उन्हें सृष्टि की चिंता और भार देवों के देव महादेव को भी देना चाहिए। तब हिमालय से महादेव पृथ्वीलोक पर आते हैं और 4 मास तक संसार की गतिविधियां वही संभालते हैं। जब चार मास पूर्ण होते हैं तब शिव जी कैलाश की तरफ रूख करते हैं। यह दिन एकादशी का ही होता है। जिसे देवउठनी एकादशी या देवप्रबोधिनी एकादशी कहते हैं। इस दिन हरिहर मिलन होता है। भगवान अपना कार्यभार आपस में बदलते हैं। चुंकि भगवान शिव गृहस्थ होते हुए भी सन्यासी हैं अत: उनके राज में विवाह आदि कार्य वर्जित होते हैं लेकिन पूजन और अन्य पर्व धूमधाम से मनाए जाते हैं। वास्तव में देवताओं का सोना प्रतीकात्मक ही होता है। इन दिनों कुछ शुभ सितारे भी अस्त होते हैं जिनके उदित रहने से मंगल कार्यों में शुभ आशीर्वाद मिलते हैं। अत: इस काल में सिर्फ पुण्य अर्जन और देवपूजन का ही प्रचलन है।
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शिव पुराण में श्रावण के शुभ समय के लिए कुछ अचूक उपाय बताए गए हैं। प्रत्येक जातक को अपनी जन्म कुंडली में ग्रहों की शुभ-अशुभ स्थिति के अनुसार शिवलिंग का पूजन करना चाहिए। ग्रहों से संबंधित कष्टों और रोगों के लिए निम्न उपाय अपनाएं।
जानिए ग्रह के अनुसार किस रोग के लिए क्या उपाय कर सकते हैं।
सूर्य से संबंधित कष्ट सिरदर्द, नेत्र रोग, अस्थि रोग आदि हों तो श्रावण मास में शिवलिंग का पूजन आक वृक्ष के पुष्पों, पत्तों एवं बिल्वपत्रों से करने से इन रोगों में आराम मिलता है।
चंद्रमा से संबंधित बीमारी या कष्ट जैसे खांसी, जुकाम, नजला, मानसिक परेशानी, रक्तचाप की समस्या आदि हों तो शिवलिंग का रुद्री पाठ करते हुए काले तिल मिश्रित दूध धार से रुद्राभिषेक करने से आराम मिलता है।
मंगल से संबंधित बीमारी जैसे रक्तदोष हो तो गिलोय, जड़ी-बूटी के रस आदि से अभिषेक करने से आराम मिलता है।
बुध से संबंधित बीमारी जैसे चर्म रोग, गुर्दे का रोग आदि हों तो विदारा या जड़ी-बूटी के रस से अभिषेक करने से आराम मिलता है।
बृहस्पति से संबंधित बीमारी जैसे चर्बी, आंतों की बीमारी या लिवर की बीमारी आदि हों तो शिवलिंग पर हल्दी मिश्रित दूध चढ़ाने से आराम मिलता है।
शुक्र से संबंधित बीमारी, वीर्य की कमी, गुप्तांग की बीमारी, शारीरिक या शक्ति में कमी हो तो पंचामृत, शहद और घी से शिवलिंग का अभिषेक करने से आराम मिलता है।
शनि से संबंधित रोग जैसे मांसपेशियों का दर्द, जोड़ों का दर्द, वात रोग आदि हों तो गन्ने के रस और छाछ से शिवलिंग का अभिषेक करने से आराम मिलता है।
राहु-केतु से संबंधित बीमारी जैसे सिर चकराना, मानसिक परेशानी आदि के लिए उपर्युक्त सभी वस्तुओं के अतिरिक्त मृत संजीवनी का सवा लाख बार जप कराकर भांग-धतूरे से शिवलिंग का अभिषेक करने से शांति मिलती है।
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प्रस्तुत है इस श्रावण मास में कुछ ऐसे उपाय जो आप घर में बैठकर ही आसानी से कर सकते हैं और शिव जी की कृपा पा सकते हैं।
आपको सिर्फ अपनी राशि पता करना है और घर में ही शिव जी की प्रतिमा या तस्वीर का प्रबंध करना है और आसान से मंत्र को 11, 21, 51 या 108 बार या दिन भर बोलना है। यह उपाय ना सिर्फ भगवान शिव को प्रसन्न करते हैं बल्कि जहां आप निवास करते हैं वहां की भूमि, वातावरण और लोगों को भी आपके अनुकूल बनाते हैं-
मेष- अगर आपकी राशि मेष है तो आपको भगवान शिव की तस्वीर पर गुलाल का तिलक लगाना है और 'ॐ ममलेश्वराय नम:' मंत्र का जाप 21 बार करना है।
वृषभ- आपकी वृषभ राशि है तो मात्र दूध से घर में रखी शिवजी की तस्वीर को अनामिका (सबसे छोटी अंगुली के पास वाली अंगुली) से स्पर्श करें। आपका मंत्र है- 'ॐ नागेश्वराय नम:' इस मंत्र का पूरे श्रावण मास में जाप करें।
मिथुन- अगर आपकी राशि मिथुन है तो शिव जी की तस्वीर पर दही को अनामिका से स्पर्श करें। सारा दिन ॐ भूतेश्वराय नम: का जाप करें।
कर्क- कर्क राशि के व्यक्ति अगर प्रतिमा हो तो शिवजी का पंचामृत से अभिषेक करें। अन्यथा तस्वीर पर अबीर से तिलक लगाएं। महादेव के '11 नाम' का स्मरण करें।
सिंह- सिंह राशि वाले व्यक्ति शिवजी की तस्वीर पर शहद से तीन बूंद स्पर्श करें। 'ॐ नम: शिवाय' की एक माला तस्वीर के समक्ष करें।
कन्या- अगर आपकी कन्या राशि है तो शिव प्रतिमा का सिर्फ शुद्ध जल से अभिषेक करें। अगर प्रतिमा नहीं है तो तस्वीर के सामने 7 बार 'शिव-चालीसा' का पाठ करें। वेबदुनिया पर (शिव चालीसा की लिंक) उपलब्ध है।
तुला- तुला राशि है तो शिव तस्वीर के सामने का घी का दीपक जलाएं। 'रुद्राष्टक' का पाठ करें।
वृश्चिक- वृश्चिक राशि वाले जातक घर में ही शिवजी की तस्वीर को संभव हो तो लाल फूल अर्पित करें अगर नहीं है तो 51 चावल गिनकर तस्वीर के सामने चढ़ाएं। 11 बार 'ॐ अंगारेश्वराय नम:' का जाप करें।
धनु- अगर आपकी धनु राशि है तो शिव की तस्वीर के नीचे शकर या गुड़ रखें। 'ॐ रामेश्वराय नम:' का 108 बार जाप करें।
मकर- मकर राशि वाले जातक शिवजी की तस्वीर के समक्ष अनार का फल रखें अगर वह संभव न हो तो कोई भी लाल फल रख सकते हैं। ॐ महाकालेश्वराय नम: का 51 बार जाप करें।
कुंभ- कुंभ राशि वाले जातक शिवजी का दूध, दही, शहद, शक्कर, घी, पांचों वस्तुओं को मिलाकर शिव जी को प्रसाद चढ़ाएं और 'ॐ शिवाय नम:' का जाप दिन भर करें।
मीन- मीन राशि वाले जातक शिवजी को उपलब्ध फल अर्पित करें। 'ॐ भौमेश्वराय नम:' का 11 बार जाप करें।

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