सतुवाई अमावस्या- वैशाख अमावस्या
हिन्दू धर्म में अमावस्या तिथि के स्वामी पितृदेव माने गए हैं। इसलिए अमावस्या के अवसर पर पितरों की आत्मा की शांति हेतु श्राद्ध कर्म तथा दान-पुण्य किया जाता है। वैसे तो अमावस्या के दिन किसी पवित्र नदी में स्नान कर दान करने की परंपरा प्रचलित है।
वैशाख मास की अमावस्या को सतुवाई अमावस्या भी कहा जाता है। इस अमावस्या के दिन पवित्र नदियों में स्नान कर पितरों की मुक्ति के लिए विभिन्न प्रकार के श्राद्ध कर्म किए जाते हैं, तो आइए हम आपको वैशाख अमावस्या की पूजा-विधि और महत्व के बारे में बताते हैं।

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वैशाख अमावस्या के बारे में जानें
अमावस्या के दिन पितृरों के तर्पण के साथ ही शनि जयंती भी मनायी जाती है। साथ ही ऐसी मान्यता है कि इसी त्रेतायुग का भी प्रारम्भ हुआ था। वैशाख महीने का महत्व इसलिए क्योंकि यह बहुत पवित्र महीना माना जाता है। इसके अलावा दक्षिण में कुछ स्थानों पर वैशाख अमावस्या के दिन शनि जयंती मनाई जाती है। इस दिन शनि भगवान की पूजा कर पीपल के पेड़ में जल अर्पित किया जाता है।
वैशाख अमावस्या से जुड़ी पौराणिक कथा
वैशाख अमावस्या से सम्बन्धित एक पौराणिक कथा प्रचलित है। उस कथा के अनुसार प्राचीन काल में धर्मवर्ण नामक का एक ब्राह्मण रहता था। वह बहुत धार्मिक प्रवृत्ति का था। अपने स्वभाव के कारण वह साधु-संतों का बहुत आदर करता था। उसने किसी से सुना कि कलयुग में विष्णु भगवान का स्मरण करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है। यह बात सुनकर उसने संन्यास ले लिया और यहां-वहां भ्रमण करने लगा। इस प्रकार भ्रमण करते हुए वह पितृलोक पहुंच गया। पितृलोक पहुंचने के बाद उसने देखा कि उसके पितृ बहुत दुखी है और परेशान हो रहे हैं। इस पर उसने अपने पितरों से दुख का कारण पूछा तो उन्होंने बताया कि वह धर्मवर्ण के सन्यास लेने के कारण बहुत दुखी है। अगर धर्मवर्ण सन्यास छोड़ कर गृहस्थ बन जाए तो और बच्चे पैदा करे तो उन्हें मुक्ति मिल जाएगी। इसके अलावा धर्मवर्ण अगर वैशाख अमावस्या पर श्राद्ध तथा तपर्ण करें तो वह सुखी रहेंगे। तब धर्मवर्ण ने उनकी बात मानकर गृहस्थ जीवन अपनाया और वैशाख अमावस्या पर दान-पुण्य किया।
वैशाख अमावस्या का महत्व
हिन्दू धर्म में अमावस्या तिथि के स्वामी पितृदेव माने गए हैं। इसलिए अमावस्या के अवसर पर पितरों की आत्मा की शांति हेतु श्राद्ध कर्म तथा दान-पुण्य किया जाता है। वैसे तो अमावस्या के दिन किसी पवित्र नदी में स्नान कर दान करने की परंपरा प्रचलित है। लेकिन इस साल कोरोना वायरस के कारण देश में लॉकडाउन है, ऐसे में आप घर में स्नान कर जरूरमंदों को खाना दे दें।
लॉकडाउन में ऐसे मनाएं वैशाख अमावस्या
हिन्दू धर्म में वैशाख अमावस्या के दिन स्नान और दान का बहुत खास महत्व होता है। लेकिन इस साल लॉकडाउन 2 के कारण घर से बाहर निकलना मुश्किल है। इसलिए घर में विशेष विधि से स्नान कर पूजा-प्रार्थना कर सकते हैं। वैशाख अमावस्या के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें। स्नान करने के लिए घर में पहले से मौजूद किसी भी नदी का जल पानी में मिला लें। उसके बाद पानी में थोड़ा सा तिल मिलाकर स्नान करें। ऐसी मान्यता है कि पानी में तिल डालकर स्नान करने से शनि का दोष निवारण होता है। इसके अलावा आप जल में तिल डालकर सूर्य को अघर्य देने से भी लाभ होता है। वैशाख अमावस्या का दिन बहुत खास होता है इसलिए इस दिन आप अपने आसपास भूखे जानवरों और लॉकडाउन के कारण भूखमरी के शिकार लोगों को सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए भोजन दे सकते हैं।

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