अनोदना सप्तमी, मरुद व्रत व मरिच सप्तमी
1. अनोदना सप्तमी
भारत में धार्मिक व्रतों का सर्वव्यापी प्रचार रहा है। यह हिन्दू धर्म ग्रंथों में उल्लिखित हिन्दू धर्म का एक व्रत संस्कार है।
चैत्र शुक्ल पक्ष की षष्ठी को उपवास से आरम्भ तथा सप्तमी पर सूर्य पूजा की जाती है।
'ओदन' में भक्ष्य, भोज्य एवं लेह्य (चाटना) सम्मिलित है, किन्तु जल ओदन नहीं है, अतः उस दिन ग्रहण किया जा सकता है।
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2. मरिच सप्तमी
भारत में धार्मिक व्रतों का सर्वव्यापी प्रचार रहा है। यह हिन्दू धर्म ग्रंथों में उल्लिखित हिन्दू धर्म का एक व्रत संस्कार है।
मरिच सप्तमी चैत्र शुक्ल पक्ष की सप्तमी पर मनाई जाती है
इस व्रत में सूर्य देवता की पूजा की जाती है।
ब्राह्मणों के भोजन कराते है और प्रत्येक ब्राह्मण को 'ओं खखोल्काय' नामक मन्त्र के साथ 100 मरिच खाने होते हैं।
इस व्रत के करने से कर्ता को अपने प्रियजनों का वियोग दु:ख प्राप्त नहीं होता है।
राम एवं सीता तथा नल एवं दमयन्ती ने यह व्रत किया था।
हेमाद्रि, और भविष्योत्तरपुराण से भी उद्धरण मिलता है।
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3. मरुद व्रत
भारत में धार्मिक व्रतों का सर्वव्यापी प्रचार रहा है। यह हिन्दू धर्म ग्रंथों में उल्लिखित हिन्दू धर्म का एक व्रत संस्कार है।
मरुद व्रत चैत्र शुक्ल पक्ष की सप्तमी को होता है।
मरुद व्रत में षष्ठी पर उपवास रखा जाता है।
सप्तमी पर ऋतुओं की पूजा की जाती है।
कर्ता को सात पंक्तियाँ बनानी होती हैं और प्रत्येक पंक्ति में सात मण्डल होते हैं, जो कि चन्दन लेप से बनाये जाते हैं।
प्रत्येक पंक्ति में 'एक ज्योतिः' से 'सप्तज्योतिः' तक सात नाम लिखे जाते हैं।
प्रत्येक पंक्ति में विभिन्न नाम भी होते हैं।
49 दीप जलाये जाते हैं।
घी का होम एवं वर्ष भर ब्रह्म भोज कराया जाता है।
अन्त में नवीन वस्त्र एवं गाय का दान दिया जाता है।
इस व्रत से स्वास्थ्य, धन, पुत्रों, विद्या एवं स्वर्ग की प्राप्ति होती है।
मरुत 7 या 7 के सात गुने हैं।

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